महानतम नाटककार शेक्सपियर अपनी रचनाओं में कहतें हैं की जीवन एक थिएटर है…..
“एज यू लाइक इट” में वह कहता है:
सारी दुनिया एक मंच है,और सारे आदमी और औरतें हैं केवल अभिनेता:
है उनके अपने-अपने बहिर्गमन और आगमन,
और एक आदमी अपने समय में खेलता है कई पात्र
“मैक्बैथ” में वह कहता है-
जीवन एक चलती-फिरती छाया है, एक बेचारा अभिनेता
जो मंच पर अपने समय में इतरता है और बिफरता है
और फिर उसका पता नही चलता; यह एक कहानी है
जिसे कहनेवाला मूर्ख है, है यह फूँ फाँ से भरी हुई, निरर्थक..
“खरंच जीवन एक मंच आहे, पुढचा सीन आधीच ठरलेला असतो.”